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मानव जीवन का उद्देश्य है कि अपने मन, वचन,कर्म और शरीर से औरों की मदद करना। हमेशा देखा गया है कि जो लोग दूसरों की मदद करते हैं, उन्हें कम तनाव रहता है, उन्हें मानसिक शांति और आनंद का अनुभव होता है। वे अपनी आत्मा से ज़्यादा जुड़े हुए महसूस करते हैं, और उनका जीवन संतोषपूर्ण होता है। जब कोई अपना मन, वचन और काया को दूसरों की सेवा के लिए उपयोग करता है, उसे सबकुछ मिल जाता है और सांसारिक सुख-सुविधा की कमी कभी नहीं होती। जब आप दूसरों के लिए कुछ करते हैं तो उसे पल एक अजीब सकून पर सुख की अनुभूति होती हैं।

Bajrang.in भारतीय ग्रथो में मानव जीवन का उद्देश्य जन्मों-जन्म के कर्म बंधन को तोड़ना और संपूर्ण मुक्ति को प्राप्त करना है। इसका उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करने के लिए सबसे पहले आत्मज्ञान की प्राप्ति करना आवश्यक है। यदि आपको आत्मज्ञान प्राप्त करने का अवसर नहीं मिलता है तो आपको परोपकार में जीवन व्यतीत करना चाहिए और ईश्वर के अनूपम उपहार का आंनद लेना चाहिए | आप सभी का इस वेबसाइट पर बहुत बहुत स्वागत है| कोशिस कर रहा हु कि आपको आपने पास  रखे कुछ जानकारियों को साँझा कर सकू| अगर कुछ गलत लगे तो जरुर आपने कमेंट देके मुझे अवगत कराये| वेसे  तो ये पूरी तरह से सामजिक कार्यो और सहायता के लिए बनायीं गयी है  पर फिर भी यहाँ पर आपको कुछ ग़ज़ल, किताबे और भजन  मिलेंगे | हम कोशिस कर रहे है आपकी उमीदो पर खरे उतर सके|

अपनी तमाम ख़ुशी और गम आपने गुरु को समर्पित करता हु  जिनका नाम  मिला और ये मार्गदर्शन मिला है मुझे|

बजरंग भजन

बजरंग बाला जपूँ थारी माला, रामदूत हनुमान, भरोसो भारी है
भारी है प्रभु भारी है, महिमा तेरी न्यारी है,
बजरंग बाला जपूँ थारी माला, रामदूत हनुमान,भरोसो भारी है
 
लाल लंगोटो वालो तू, अंजनी माँ को लालो तू,
राम नाम मतवालो तू, भगतां को रखवालो तू,
सालासर तेरा भवन बना है, मेहंदीपुर तेरा भवन बना है,
सुन ले पवन कुमार, भरोसो भारी है,
बजरंग बाला जपूँ थारी माला, रामदूत हनुमान,भरोसो भारी है
 
शक्ति लक्ष्मण के लागि, पल माहि मूर्छा आगि,
द्रोणगिरि पर्वत ल्यायो, सांचो है तू अनुरागी,
घोल संजीवन लखन पिलाये – २, जागे वीर महान,
भरोसो भारी है, बजरंग बाला जपूँ थारी माला, रामदूत हनुमान, भरोसो भारी है
 
तूने लंका जारी रे, मारे अत्याचारी रे,
हुकुम के तावेदारी रे, बालजति ब्रम्हचारी रे,
अहिरावण की भुजा उखाड़ी – २, ल्यायो तू भगवान्,
भरोसो भारी है, बजरंग बाला जपूँ थारी माला, रामदूत हनुमान,भरोसो भारी है
 
बड़े बड़े कारज सारे, दुष्टों को दलने वाले,
सच्ची भगति के बल से घट में राम दिखा डाले,
चीर कलेजा तू दिखलाया – २, मगन भये भगवान्,
भरोसो भारी है, बजरंग बाला जपूँ थारी माला, रामदूत हनुमान,भरोसो भारी है
 
बल को तेरो पार नहीं, ना तुझसा दिलदार कोई,
शंकर को अवतार तुहीं, सांचो हिम्मतदार तुहीं,
शरण पड़े को आन उबारो – २, सेवक करे पुकार,
भरोसो भारी है, बजरंग बाला जपूँ थारी माला, रामदूत हनुमान,भरोसो भारी है
 
बजरंग बाला जपूँ थारी माला, रामदूत हनुमान,भरोसो भारी है
भारी है प्रभु भारी है, महिमा तेरी न्यारी है,
बजरंग बाला जपूँ थारी माला, रामदूत हनुमान,भरोसो भारी है