CAA का विरोध है या देश से बगावत??

CAA  क्या है :

नागरिकता संशोधन कानून से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए अल्प्सख्यक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिस्चन धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के देना है । पहले किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम 11 साल  लगातार यहां रहना अनिवार्य था। इस नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर 6 साल किया गया है यानी इन तीनों देशों के ऊपर उल्लिखित छह धर्मों के बीते एक से छह सालों में भारत आकर बसे लोगों को नागरिकता मिल सकेगी। आसान शब्दों में  तीन मुस्लिम बहुसंख्यक पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने के नियम  है।

कौन है अवैध प्रवासी और अवैध प्रवासियों के लिए क्या है प्रावधान?
नागरिकता कानून, 1955 के मुताबिक अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता नहीं मिल सकती है। कानून के तहत उन लोगों को अवैध प्रवासी माना गया है जो भारत में वैध यात्रा दस्तावेज जैसे पासपोर्ट और वीजा के बगैर घुस आए  फिर वैध दस्तावेज के साथ तो भारत में आए हों लेकिन उसमें उल्लिखित अवधि से ज्यादा समय तक यहां रुक जाएं। 
अवैध प्रवासियों को या तो जेल में रखा जा सकता है या फिर विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 के तहत वापस उनके देश भेजा जा सकता है। लेकिन केंद्र सरकार ने साल 2015 और 2016 में उपरोक्त 1946 और 1920 के कानूनों में संशोधन करके अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिस्चन को छूट दे दी है। इसका मतलब यह हुआ कि इन धर्मों से संबंध रखने वाले लोग अगर भारत में वैध दस्तावेजों के बगैर भी रहते हैं तो उनको न तो जेल में डाला जा सकता है और न उनको निर्वासित किया जा सकता है। जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत पहुंचे हैं। इन्हीं धार्मिक समूहों से संबंध रखने वाले लोगों को भारत की नागरिकता का पात्र बनाने के लिए नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 संसद में पेश किया गया था।

आज देश में जिस तरह का माहौल बना हुआ है या ये बोले कि बनाया गया है। उससे देश के एक धर्म विशेस को बहुत दुख पहुच रहा है।।

JNU और JMI का मुद्दा:

JNU के छात्र संगठान की लड़ाई उनकी फीस की बढोतरी थी। जो कि हर कॉलेज का अपना निजी मसला होता है। और ये कॉलेज और वह के छात्रों के बीच ही सुलझाया जा सकता है। ऐसा नही है कि देश के कॉलेज में फीस  बढोतरी पर कभी बवाल नही हुआ। बहुत बार हुए है और ये भविष्य में भी होने चाहिए क्यों कि शिक्षा सभी का अधिकार है।  अब बात आती है जब ये सभी संस्थानों में होता है तो फिर बवाल क्यों?

तो मैं बताना चाहूंगा कि ये वही संस्थान है जहाँ से देश के विरुद्ध आवाजे निकलती है। बच्चे देश विरोधी है में ये नही कहना चाहता। मेरा मतलब राजनेतिक संबंधों से है। बच्चे  जो फीस के विरोध में थे कब उनका विरोध CAA को लेके बदल गया उन्हें भी नही पता लगा। खुद JNU के बच्चें ओर संस्था के संचालक मानते है कि उनके आंदोलन को हाईजेक कर लिया गया।

 

दंगाई ओर उनके सुभचिंतक : 

आंदोलन जो कि फीस बढ़ोतरी से चालू हुया था उसको राजनीतिक पार्टियों ने आपने फायदे के हिसाब से बदल भी लिया और मतलब भी निकलने लगे।

आम आदमी पार्टी :  दिल्ली में  चुनाव है लिहाजा फ्री बाटने वाले क्यों न पहुँचते। सबसे आगे वही थे।  जब बात कॉलेज के आगे नही बनती दिखी तो चलो जंतर मंतर के नारे लगे ओर गरीब बच्चे जिन्हें  स्कूल में पेपर देना था वो सड़को पर इनके चक्रों में आ के नारे लगाने लगे ओर फिर सुरू हुआ इनका दंगाई खेल।  मुह पर रुमाल लगाए लड़के और हाथों में पत्थर   फकने चालू हुए। बसों पर फेके जिनमे कई लोग घायल भी हुए जिनका न कॉलेज से कोई लेना था न ही CAA से। जब भीड़ को बेकाबू होता देख ओर सिपाहियों ने खुद पर पथराव देखा तो सुरु हुआ सख्ती के दौर आखिर पोलिसी में दंगाईयो पर विजय पा ली। आम आदमी पार्टी ने देखा कि अब लड़के तो आंदोलन करेंगे नही ओर अगर आंदोलन नही होता है तो हमारा BJP को नीचा दिखाने का मौका हाथ से निकल जायेगा। लिहाज सरकारी नौकरी और 5 लाख का लालच आगे फेक दिया गया । जिसे वो फिर से तैयार हो कर आंदोलन करने आए। दंगाईयो की तो चाँदी हो गई थी जो पीछे से सपोर्ट ओर आर्थिक मदत मिल रही थी वो तो थी ही अब आगे से भी आप पार्टी से मदद मिलनी चालू हो गयी थी

कांग्रेस इस खेल में पहले से माहिर है  क्यों कि उनको दंगो का बहुत ही अनुभव भी है। ओर कही न कहिउनके समर्थन में ही बिल भी पास हुए था तो वो खुल के सामने नही आना चाहते थे।  वो देख रहे थे कि कब बात बिगड़े ओर वो उसपर आके सहानुभूति का मलहम लगा के वोट बैंक मजबूत कर सके।

आन्दोलन की मुख्य बाते:

इसमे सभी आन्दोलन कर्ता पढ़े लिखे थे। गरीब और अनपढ़ आदमी इस समझदारों की जमात को दूर से हाथ जोड़ कर प्रणाम कर गए।

दंगो का दमन:

दंगा दिल्ली से सुरु हुए दूसरे राज्यो में तभी पहुच जब इसकी कवरेज BJP के नेता करते। लिहाज़ा जब BJP के नेताओ ने कहा कि  जो ग्रमीण लोग है वो आंदोलन नही कर रहे तो फिर ये अगले दिन से उत्तर प्रदेश में भी सुरु हुआ। पहले दिन के दंगों मर बहुत ही ज्यादा उत्पात मचाया गया । कई गाड़िया जलाई गई। पोलिश थाना जल दिया। पर योगी सरकार ने जो सख्ती दिखाई और जैसे ही पुलिस ने एक्शन लेने स्टार्ट किया अगले दिन से सब दंगे सांत हो गए। IT सेल की समझदारी ओर सूझ बूझ ने दंगाईयो को रसद रोक दी जो कि दंगो को सान्त करने में कारगर साबित हुया।।