नोकरियों पर मंडराता खतरा

नौकरियों पर मंडराता खतरा

20वी सदी में पैदा हुए लोगो के लिए तो शायद ऐसा सोचना ओर होना भी अकल्पनीय लगता है।

दुनिया मे एक दौड़ लगी थी ओर सब उसी में भाग रहे थे। जितना तेज़ भागते उनको लगता अभी भी धीरे है। और उस दौड़ में हमने आपने सभी मूलभूत चीज़ों  ओर रिस्तो का नाश कर लिया। हमारे पास कुछ भी सुध नही बचा था।

1. हवा: हवा में जहर इतना था कि अंदर से खोखले हो रहे थे और हमे पता भी नही लग रहा था।

2. पानी :हमने इतने RO लगा पानी को सुध किया की सुध पानी भी हैमे दुख देने लगे।

3. खाना: हम इतनी ज्यादा बेकार की ओर बे समय खाने लगे कि हद नही रही। हमने अनाज की पैदावार बढ़ाने के लिए बहुत से वैज्ञानिक प्रोयोग किए। उन प्रयोगों ने हमे उल्टा इंसान से प्रयोगशाला ही बना दिया पर डॉक्टरों के लिए।

एक कोरोना क्या आया अब लगता है जैसे समय का पहिया उल्टा घूम गया हो।

हवा, पानी और खाना सब सुध हो गए है। पर जो कुछ नही बचा है वो है नोकरिआ। लॉक डाउन में जहा सब कुछ बन्द है वही बैंड हो गईं भी देश के 30% लोगो की जिंदगियां।

इन 30% मे 10 %वो लोग है जिनके पास कुछ भी नही है। जैसे भीख मांग कर खाने वाले, रोजाना कमाने वाले, छोटे धंधे ओर सर्विस देने वाले अनपढ़ ओर आर्थिक कमजोर लोग बाकी के 20 % लोग वो है जो थोड़े पढ़े लिखे है या ज्यादा पढ़े लिखे है। जिनके पास अपने घर तो है पर जमीन नही है।  या ये कहे माध्यम वर्गीय नॉकरी पेशा लोग। ज्जिनक परिवार का भरण पोषण नॉकरी से ही चलता है। अब कोरोना ने उनको दोनों तरफ से तंग करने चालू किया है।

भारत मे बेरोज़गारी:

पिछले 5 सालों से भारत मे बेरोजगारी दर में 2-3% की बढ़ोतरी हुई थी पर जब मई के महीने की शुरुवात में आंकड़े जो आये वो तो लोगो को बहुत ही दुख देने वाला था। आकड़ो में 14% की बढ़ोतरी थी। अब भारत मे 27% लोग बेरोजगार हो गए है। जो कि एक बड़ी चिंता का विषय है। भारत मे बहुत सी कंपनी से तो अप्रैल की सैलरी भी नही दी साथ लोगो को  नॉकरी से निकल भी दिया है। ऐसे में अनुमान ये भी है कि आने वाले 2 महीनों में 15 % ओर नौकरियां जाएंगी। और ये वो लोग होंगे जिनके पास जीविका का साधान सिर्फ नौकरी ही है।

सरकार के प्रयासों की तो कहना ही क्या है। देश के अमीरों के पैसा माफ करके एक तरह से उनको मुक्ति दे दी।  पर बैंको ने तो गरीबो के गले दबाना सुरु किया। एक तरफ नगदी को कम करके पैसे का सरकुलेशन सरकार बढ़ना चहई है। पर अब बेंकोंके चार्जर्स इतने लगा रहे है कि लोगो को नगदी ही उपयोग में लानी होगी।

पिछले महीने ही बहुत से बदलाब बैंको ने किए है उन अब IMPS पर चार्ज लेने लगे है। NEFT ओर RTGS पर भी करीब 2-6 रुपये तक चार्ज ले रहे है।

गरीबो के लिए दिखावा इतना हुआ की लोगो के आँखो में पानी नहीं सुख रहा है | सरकारों के दावे  रोज सड़को पर दिखती है | लाखो लोग मज़बूरी में सड़को पर आ गए है | सरकारों के वादे अस्सी ही है जैसे बारिश के भरोशे होने वाली खेती |

कुछ उद्धरण इस प्रकार है

१. बिहार सरकार प्रति व्यक्ति १ किलो चावल और 4 किलो गेंहू दे रही है | अब कोई समझाए 5 किलो में कोई कैसे महीने भर कैसे खा लेगा  उसमे भी चवल में किलो में 200 कंकर निकल रहे है| जो बिहार से बहार थे और जिनके पास राशनकार्ड नहीं है उनका क्या होगा | ये अभी तक किसी ने नहीं सोचा है

२. दिल्ली की सरकार : वादे  और मीडिया  में दिखावा करना कोई दिल्ली की सरकार से समझ सकते है | सभी को सामुदायिक रसोई से खाना खिला रही है  जिनके पास राशनकार्ड  के बिना भी सहन बाटते है पर लोजो तक पहुंच भी पता | दिल्ली की सरकार  की मने तो दिल्ली में 1 करोड़  लोगो को 7.5 किलो राशन बात रही है

दिल्ली को पूरी आबादी ही 1.9 करोड़ की आबादी है | जिसपर से 30 % जनता दिल्ली के अगल बगल वाले है वो की रहते है पर उनके ज्यादा समय काम की वजह से दिल्ली में बीतता है वार्ना सभी आपने आपने गॉव चले जाते है | फिर 10 % जनसँख्या है वो दूर से राज्यों से आये थे J&K  से विस्थापित होकर बसे है | जो की12 % है अभी बिहार की जनता को मत भूलिए 20-25  ये वही थे जो लाखो की संख्या में आनंद विहार पर जमा हुए थे |

मेरा कहना  बस यही है की सरकार मदद नहीं करने वाली आपको खुद ही कुछ करना होगा |

सरकारों के खर्च गरीबो से भी ज्यादा है  वो चाह  के भी कुछ नहीं करने वाले |

आपसे  यही उम्मीद है की बिना काम के बहार न जाये आपने साथ  पेपर वाला साबुन भी साथ रखे या फिर सेनिटाइज़र  का उंपयोग करे जिहे काम पर जाना पड़ रहा है

 

 

 

 

 

 

 

 

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